Monday, October 12, 2015

महाराजजी अदृश्य हो गये

एक बार कांग्रेस के कुछ पचास साठ कार्यकर्ता महाराज जी के दर्शन के लिए आ रहे थे. उस वक्त महाराजजी हनुमानगढ़ में थे. महाराजजी ने दूर से देख लिया कि वे लोग आश्रम की तरफ आ रहे हैं. उन्होंने एक भारतीय संन्यासी रामदास को साथ लिया और पहाड़ी से नीचे उतरकर एक देवी मंदिर में चले गये.

इधर पार्टी के लोग जब आश्रम में पहुंचे तो उन्होंने महाराजजी के बारे में पता किया. वहां लोगों ने बता दिया कि वे पहाड़ी से नीचे की तरफ गये हैं. वे लोग नीचे उतरकर उसी मंदिर के पास पहुंच गये जहां महाराजजी रामदास के साथ मंदिर के बाहर ही बैठे हुए थे. वे लोग साठ फीट दूर खड़े होकर मंदिर के चारों तरफ देखने लगे लेकिन उन लोगों को न महाराजजी दिखाई नहीं दिये और न ही रामदास. उन्हीं के सामने खड़े होकर वे लोग नींब करौली बाबा के बारे में आपस में पूछताछ कर रहे थे लेकिन महाराजजी उनको दिखाई नहीं दे रहे थे.

तभी रामदास को बड़ी जोर की खांसी आने को हुई. वे हशीश पीते थे और उनको खांसी आती रहती थी. उन्होंने मुंह दबाते हुए महाराज जी की तरफ देखा कि कहीं खांसने पर उनका पता न चल जाए, महाराजजी ने उनसे कहा, 'चिंता मत करो. जितना खांस सकते हो खांस लो.' और रामदास तब तक खांसते रहे जब तक उन्हें आराम नहीं मिल गया.

लेकिन वहां मौजूद अन्य लोगों को न तो रामदास की खांसी सुनाई दी और न ही उन दोनों की बातचीत. जब कांग्रेसवाले हारकर वहां से चले गये उसके बाद ही महाराजजी प्रकट हुए.

#महाराजजीकथामृत

(रामदास, मिराकल आफ लव, दूसरा संस्करण, 1995, पेज- 115)

-------------------------------------------------------------------
🌺 जय जय नींब करौरी बाबा!! 🌺
🌺 कृपा करहु आवई सद्भावा!! 🌺
-------------------------------------------------------------------

No comments:

Post a Comment