Showing posts with label रामदास. Show all posts
Showing posts with label रामदास. Show all posts

Tuesday, November 17, 2015

आंखों की रोशनी वापस आ गयी

एक बार इलाके के एक बुजुर्ग की दोनों आंखें चली गयी। उस वक्त वे बुजुर्ग महाराजजी के पास ही रह रहे थे। लोगों ने जब महाराजजी से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि "समर्थ गुरू रामदास ने अपनी मां के अंधेपन का इलाज किया था। दुनिया में ऐसा दूसरा संत नहीं है।" यह कहकर महाराजजी ने एक अनार मंगवाया और उसको मसलकर उसका जूस पी गये और उन्होंने अपने कंबल को अपने ऊपर ओढ़ लिया। उनकी आंखों से खून निकल रहा था। इसके बाद महाराजजी ने उस व्यक्ति से कहा कि तुम्हारी दृष्टि वापस आ जाए तो अपने व्यापार से रिटायर हो जाना और अपनी आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ना।

अगले दिन डॉक्टर आये और जब उन बुजुर्ग की आंखों का परीक्षण किया तो चौंक गये। उन्होंने कहा कि यह असंभव है। किसने किया यह? लोगों ने बताया महाराजजी ने। डॉक्टर ने पूछा कि वे अब कहां हैं तो लोगों ने बताया कि वे तो जा चुके हैं। डॉक्टर भागते हुए स्टेशन पहुंचे। महाराजजी ट्रेन में सवार हो चुके थे। डॉक्टर दौड़कर बोगी में पहुंच गये। डॉक्टर को देखते ही महाराजजी ने कहा, देखो ये कितने काबिल डॉक्टर हैं। इन्होंने उस बुजुर्ग व्यक्ति की आंख ठीक कर दी। ये बहुत अच्छे डॉक्टर हैं।

हालांकि तीन चार महीने बाद ही वे बुजुर्ग अपने आपको रोक नहीं पाये और काम पर वापस लौट गये। उसी दिन उनके आंखों की रोशनी फिर से चली गयी।

#महाराजजीकथामृत

(रामदास, मिराकल आफ लव, पहला संस्करण, 1979, पेज- 318)
------------------------------------------------------------------
🌺 जय जय नींब करौरी बाबा! 🌺
🌺 कृपा करहु आवई सद्भावा!! 🌺
------------------------------------------------------------------

Saturday, November 14, 2015

गुरु भक्ति

एक दिन मैं महाराजजी से कुछ दूरी पर उनके सामने ही बैठा हुआ था। बहुत सारे भक्त उनके आसपास बैठे हुए थे। बात हो रही थी। हंसी मजाक चल रहा था। कुछ उनके पैरों की मालिश कर रहे थे। लोग उन्हें सेव और फूल दे रहे थे। वे उन चीजों को प्रसाद रूप में लोगों में वितरित कर रहे थे। सब तरफ प्रेम और करुणा बरस रही थी। लेकिन मैदान में कुछ दूरी पर मैं अलग ही अवस्था में बैठा हुआ था।

मैं सोच रहा था कि सब ठीक है लेकिन यह सब तो एक मूर्तरूप से जुड़ा प्रेम है। मैंने यह कर लिया अब मुझे इसके परे जाना है। वे कुछ खास नहीं हैं हालांकि वे सबकुछ हैं। मैं दुनिया में जहां कहीं भी हूं, उनके चरणों में हूं। मैं उनके साथ जिस अवस्था में जुड़ा हूं उसके लिए शरीर की मर्यादा का होना जरूरी नहीं है। जागृत अवस्था में हम एक हैं।

तभी मैंने देखा कि महाराजजी एक बुजुर्ग भक्त के कान में कुछ कह रहे हैं और वह बुजुर्ग भक्त भागकर मेरे पास आया और मेरे पैर छूकर खड़ा हो गया। मैंने पूछा, "आपने यह क्यों किया?" उन्होंने कहा, "महाराजजी ने कहा है। उन्होंने कहा कि मैं और वो एक दूसरे को अच्छे से समझते हैं।"

#महाराजजीकथामृत

(रामदास, जर्नी आफ अवेकनिंग, ई बुक, पेज- १२५)
------------------------------------------------------------------
🌺 जय जय नींब करौरी बाबा! 🌺
🌺 कृपा करहु आवई सद्भावा!! 🌺
------------------------------------------------------------------

Tuesday, November 3, 2015

गंगाजी में बहता है दूध

माघ मेला में महाराजजी अपने भक्तों को बताते रहते थे कि गंगा में पानी नहीं दूध बहता है। एक दिन जब महाराजजी कुछ अन्य भक्तों के साथ गंगाजी में नौका यात्रा कर रहे थे तब कुछ भक्तों ने सोचा कि क्यों न महाराजजी की बात का परीक्षण किया जाए? हालांकि उन्होंने महाराजजी से कुछ नहीं कहा लेकिन महाराजजी ने खुद उनसे कहा कि एक लोटा गंगाजल भरकर ढंक दो। जब वह गंगाजल गिलास में डाला गया तो शुद्ध दूध बन चुका था। एक भक्त ने यह चमत्कार देखा तो सोचा कि थोड़ा सा दूध वह लेकर जाएगा और मेले में दूसरे भक्तों को भी दिखायेगा लेकिन महाराजजी ने गुस्से में उसके हाथ से दूध का वह गिलास छीनकर गंगाजी में प्रवाहित कर दिया।

#महाराजजीकथामृत

(रामदास, मिराकल आफ लव, दूसरा संस्करण (1995, पेज- 114-15)

------------------------------------------------------------------
🌺 !! जय जय नींब करौरी बाबा !! 🌺
🌺 !! कृपा करहु आवई सद्भावा !! 🌺
------------------------------------------------------------------

Sunday, October 25, 2015

प्रसाद लो

एक बार लखनऊ में महाराजजी ने नगर निगम के कुछ अधिकारियों को साथ लिया और सबसे गरीब मुहल्ले की तरफ सड़क नाली पानी की हालत देखने पहुंच गये। वहां पहुंचकर उन्होंने एक मुसलमान को अपने पास बुलाया और बोले- मुझे भूख लगी है।

मुसलमान ने कहा, लेकिन महाराजजी मेरे पास खिलाने के लिए कुछ भी नहीं है।

महाराजजी ने कहा, "तूने घर के छप्पर में दो रोटी नहीं छिपा रखी है दुष्ट?"

उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि महाराजजी को कैसे पता चला? वह छप्पर में से दो रोटी निकाल लाया। एक रोटी महाराजजी ने खाई और दूसरी रोटी अधिकारियों को दे दी जिसमें हिन्दू ब्राह्मण भी थे। महाराजजी ने कहा, "प्रसाद लो।"

#महाराजजीकथामृत

(रामदास, मिराकल आफ लव, दूसरा संस्करण, 1995, पेज- 43-45)

-------------------------------------------------------------------
🌺 जय जय नींब करौरी बाबा!! 🌺
🌺 कृपा करहु आवई सद्भावा!! 🌺
------------------------------------------------------------------

Tuesday, October 13, 2015

सब तरफ महाराज जी

महाराजजी के एक भक्त के मन में संशय था कि एक ही वक्त में महाराज जी अलग अलग जगहों पर कैसे हो सकते हैं? महाराज जी ने उनसे तीन बार कहा, जाओ जरा उन कमरों को देखकर आओ कि वहां क्या चल रहा है. आखिरकार वह भक्त वहां से उठकर कमरों की तरफ चला गया. वह हर कमरे में जाता तो महाराज जी को पाता. छह कमरे थे और सबमें से महाराजजी बाहर निकलते दिखाई दे रहे थे.

#महाराजजीकथामृत

(रामदास, मिराकल आफ लव, पेज- 170)
-----------------------------------------------------------------
🌺 जय जय नींब करौरी बाबा! 🌺
🌺 कृपा करहु आवई सद्भावा!! 🌺
-----------------------------------------------------------------

Monday, October 12, 2015

महाराजजी अदृश्य हो गये

एक बार कांग्रेस के कुछ पचास साठ कार्यकर्ता महाराज जी के दर्शन के लिए आ रहे थे. उस वक्त महाराजजी हनुमानगढ़ में थे. महाराजजी ने दूर से देख लिया कि वे लोग आश्रम की तरफ आ रहे हैं. उन्होंने एक भारतीय संन्यासी रामदास को साथ लिया और पहाड़ी से नीचे उतरकर एक देवी मंदिर में चले गये.

इधर पार्टी के लोग जब आश्रम में पहुंचे तो उन्होंने महाराजजी के बारे में पता किया. वहां लोगों ने बता दिया कि वे पहाड़ी से नीचे की तरफ गये हैं. वे लोग नीचे उतरकर उसी मंदिर के पास पहुंच गये जहां महाराजजी रामदास के साथ मंदिर के बाहर ही बैठे हुए थे. वे लोग साठ फीट दूर खड़े होकर मंदिर के चारों तरफ देखने लगे लेकिन उन लोगों को न महाराजजी दिखाई नहीं दिये और न ही रामदास. उन्हीं के सामने खड़े होकर वे लोग नींब करौली बाबा के बारे में आपस में पूछताछ कर रहे थे लेकिन महाराजजी उनको दिखाई नहीं दे रहे थे.

तभी रामदास को बड़ी जोर की खांसी आने को हुई. वे हशीश पीते थे और उनको खांसी आती रहती थी. उन्होंने मुंह दबाते हुए महाराज जी की तरफ देखा कि कहीं खांसने पर उनका पता न चल जाए, महाराजजी ने उनसे कहा, 'चिंता मत करो. जितना खांस सकते हो खांस लो.' और रामदास तब तक खांसते रहे जब तक उन्हें आराम नहीं मिल गया.

लेकिन वहां मौजूद अन्य लोगों को न तो रामदास की खांसी सुनाई दी और न ही उन दोनों की बातचीत. जब कांग्रेसवाले हारकर वहां से चले गये उसके बाद ही महाराजजी प्रकट हुए.

#महाराजजीकथामृत

(रामदास, मिराकल आफ लव, दूसरा संस्करण, 1995, पेज- 115)

-------------------------------------------------------------------
🌺 जय जय नींब करौरी बाबा!! 🌺
🌺 कृपा करहु आवई सद्भावा!! 🌺
-------------------------------------------------------------------

Wednesday, August 5, 2015

खिड़की में टिकट

महाराज जी एक भक्त के साथ ट्रेन के पहले दर्जे में यात्रा कर रहे थे. भक्त को लगा कि टीटीई के आने तक टिकट महाराजजी को दे देंगे तो सुरक्षित रहेगा.

महाराजजी ने भक्त की तरफ देखा और पूछा "यह किसलिए है?" महाराज जी ने यह कहते हुए दोनों टिकट चलती ट्रेन की खिड़की से बाहर फेंक दिया. 

महाराजजी अपनी चर्चा में मगन हो गये लेकिन इधर भक्त टिकट को लेकर चिंतित था. अंतत: कम्पार्टमेन्ट के दरवाजे पर टीटीई आया और उसने टिकट के लिए पूछा. भक्त महाराज जी से टिकट के लिए कहने में थोड़ा सकुचाया लेकिन फिर कह दिया कि टीटीई टिकट के लिए पूछ रहा है.

महाराजजी ने खिड़की में हाथ डाला और दोनों टिकट टीटीई को दे दिये और हंसते हुए भक्त से बोले, "तुम इसी के लिए इतना परेशान थे?"

(रामदास, मिराकल आफ लव http://maharajji.com/Miracle-of-Love/train-tickets-out-the-window.html)
-------------------------------------------------------------
🌺 जय जय नींब करौरी बाबा! 🌺
🌺 कृपा करहु आवई सद्भावा!! 🌺
-------------------------------------------------------------

Saturday, August 1, 2015

बुलेटप्रूफ कंबल

1943 में महाराज जी फतेहगढ़ पधारे थे. वे जिस घर पहुंचे वहां बुजुर्ग दंपत्ति ही रहते थे. उनका जवान बेटा बर्मा में युद्ध लड़ रहा था. घर पहुंचने के बाद महाराज जी ने रात में वहीं आराम करने के लिए कहा. बुजुर्ग दंपत्ति के पास दो ही चारपाई थी. उन्होंने एक चारपाई और कंबल रात में विश्राम करने के लिए महाराज जी को दिया.

महाराज जी आराम करने लगे. वे रातभर कराहते रहे और बेचैन रहे. वे बुजुर्ग दंपत्ति बैठकर महाराज की देखते रहे करीब चार बजे उनकी कराह बंद हुई और साढ़े चार बजे बेडशीट को लपेटकर बुजुर्ग दंपत्ति को देते हुए कहा "इसे गंगाजी में प्रवाहित कर दो. वहां प्रवाहित करना जहां गंगाजी गहरी हों. और ध्यान रखना कोई देखे नहीं वर्ना पुलिस पकड़ लेगी."

उन्होंने वैसा ही किया जैसा महाराजजी ने कहा था. लेकिन रास्ते में उन्होंने महसूस किया कि इसमें गोलियों जैसा कुछ भरा हुआ है. लौटकर आये तो महाराज जी ने कहा "चिंता मत करो. तुम्हारा बेटा एक महीने में आ जाएगा."

करीब एक सप्ताह बाद जब उनका बेटा लौटकर आया तो उसने बताया कि वह मौत के मुंह से निकलकर आ रहा है. युद्ध के दौरान उसकी कंपनी को दुश्मनों ने घेर लिया था और उसके सारे साथी मारे गये. सारी रात गोलीबारी होती रही और चार बजे जब जापानी फौज को लगा कि सारे लोग मारे जा चुके हैं तो वे चले गये. भारतीय फौज की दूसरी टुकड़ी सुबह साढ़े चार बजे वहां पहुंची और वह जिन्दा बचनेवाला अकेला बचा था. (यह वही रात थी जिस रात महाराज जी वहां पधारे थे.)

(रामदास, मिराकल आफ लव,  दूसरा संस्करण, 1979, पेज-98- 99)

-----------------------------------------------------------------
🌺 जय जय नींब करौरी बाबा! 🌺
🌺 कृपा करहु आवई सद्भावा!! 🌺
-----------------------------------------------------------------
राम! राम! राम! राम! राम!

Tuesday, July 7, 2015

जलेबी


एक बार जब हम कैंची जा रहे थे तो रास्ते में भवाली में रुके. उस वक्त मेरी बेटी भी मेरे साथ थी. भवाली में उसने जलेबी खाने की मांग कर दी. लेकिन वहां जलेबी कहीं दिखी नहीं तो मैंने कहा कि ''कैंची पहुंचेगे तो मिल जाएगी."

लेकिन जब हम कैंची पहुंचे तो पता चला कि आज एकादशी है और उस दिन आश्रम में सिर्फ उबले आलू मिलते हैं.

लेकिन जब हम महाराज जी के कमरे में पहुंचे तभी आश्चर्यजनक रूप से एक व्यक्ति जलेबी भरी टोकरी लेकर आया. मेरी बेटी की तरफ इशारा करते हुए महाराजजी ने कहा कि "सबसे पहले उस लड़की को दो." वे सब जानते थे.

(रामदास, मिराकल आफ लव, दूसरा संस्करण, 1995 पेज- 39)
-----------------------
जय जय नींब करौरी बाबा!
कृपा करहु आवई सद्भावा!!